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Telegram: कोई इसे हैक करके दिखा दे तो उसे ईनाम दिया जाएगा

डाटा चोरी को लेकर एप के सीईओ दावा कर चुके हैं कि अगर कोई इसे हैक करके दिखा दे तो उसे ईनाम दिया जाएगा. इस एप में End To End Chat Encryption की भी सुविधा है. जिसका मतलब हुआ कि सेंडर और रिसीवर के अलावा बीच में कोई भी व्यक्ति चैट को नहीं पढ़ सकता है.

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नई दिल्लीः इन दिनों सोशल मीडिया का क्रेज लोगों के बीच बढ़ गया है. हर कंपनियां अपने आपको यूजर्स के बीच लिस्टेड करने के लिए नए-नए चैटिंग एप ला रही है. सभी कंपनियों की कोशिश है कि यूजर्स के बीच लोकप्रिय हो जाएं. कंपनियां चाहती है कि यूजर्स ज्यादा से ज्यादा उनके एप को इस्तेमाल में लाएं. लेकिन, व्हाट्सएप ने सभी को पीछे छोड़ दिया है. अब चैटिंग एप टेलीग्राम मार्केट में व्हाट्सएप को कड़ी टक्कर दे रही है.

लोकप्रियता के पैमाने पर देखें तो यूजर्स के बीच यह काफी पसंद किया जा रहा है. सितंबर के आंकड़ों पर नजर डालें तो 91.2 लाख लोगों ने टेलीग्राम चैटिंग एप को अपने फोन में डाउनलोड किया.

बढ़ रहे हैं टेलीग्राम के यूजर्स

आकंड़ों पर अगर गौर करें तो दिसंबर 2018 में 28.5 लाख लोगों ने इसे अपने मोबाइल में डाउनलोड किया था. महीने दर महीने यह आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ता रहा. मार्च 2019 में 54.7 लाख, जून 2019 में 64.5 लाख पहुंच गया था.

एक्टिव यूजर्स की बात करें तो दिसंबर 2018 में 1.8  करोड़, मार्च 2019 में 2.2, जून 2019 में 2.5, जबकि सितंबर 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.9 करोड़ पहुंच गया.

डाटा चोरी को लेकर एप के सीईओ दावा कर चुके हैं कि अगर कोई इसे हैक करके दिखा दे तो उसे ईनाम दिया जाएगा
. इस एप में End To End Chat Encryption की भी सुविधा है. जिसका मतलब हुआ कि सेंडर और रिसीवर के अलावा बीच में कोई भी व्यक्ति चैट को नहीं पढ़ सकता है.


1.5 जीबी तक की फाइल्स कर सकते हैं ट्रांसफर

इस एप के जरिए 1.5 GB तक की फाइल्स को आसानी से शेयर किया जा सकता है. इसे पीसी और टैबलेट के जरिए भी चलाया जा सकता है. इस एप के जरिए चैट इतना सेफ होता है कि इस एप को सेक्रेट चैट भी कहा जाता है.

इस चैटिंग एप पर व्हाट्सएप की तरह ग्रुप भी बना सकते हैं. जिसे ‘चैनल’ के नाम से जाना जाता है. चैनल में अनलिमिटेड सदस्यों को जोड़ा जा सकता है. जबकि व्हाट्सएप ज्यादा से ज्यादा 256 सदस्यों को ही जोड़ा जा सकता है.

रूसी भाईयों ने बनाया है इस एप को

इस एप को रूस के दो भाईयों ने मिलकर बनाया है. इसके फाउंडर मेंबर निकोलाई और पावेल ड्यूरोव हैं. एप की लॉन्चिंग साल 2013 में हुई थी. पावेल इस एप को चलाने में धन जुटाते हैं और आईडिया देते हैं. जबकि इसका टेक्निकल मामला निकोलाई देखते हैं.

पावेल को रूस का मार्क जुकरबर्ग कहा जाता है. एप को डेवलव करने वाली टीम मौजूदा समय में दुबई में बैठकर काम करती है.